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ग्लोबली टेंशन से बिखरा भारत का शेयर बाजार, ₹11 लाख करोड़ स्वाहा, सेबी की सख्ती का भी असर

Last Updated on अक्टूबर 3, 2024 17:30, अपराह्न by Pawan

ग्लोबली टेंशन और सेबी की सख्ती के बीच भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों की लुटिया डुबो दी है। दरअसल, सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को शेयर बाजार के दोनों सूचकांक- सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट देखी गई। इस गिरावट की वजह से बीएसई पर सभी सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैपिटल करीब 11 लाख करोड़ रुपये घटकर 464.3 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह एक ही दिन में निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।

सेंसेक्स- निफ्टी का हाल

गुरुवार को ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स 1800 अंक से अधिक गिर गया तो निफ्टी 50 में भी 500 अंक से ज्यादा की गिरावट देखी गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 1,769.19 अंक का गोता लगाते हुए 82,497 अंक और एनएसई निफ्टी 547 अंक फिसलकर 25250 अंक पर बंद हुआ।

ग्लोबली टेंशन का है माहौल

दरअसल, बीते कुछ दिनों से ईरान और इजराइल के बीच तनाव का माहौल है। ईरान ने इजराइली हमले में आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह और अन्य कमांडरों की मौत के जवाब में इजराइल पर लगभग 200 मिसाइल दागी हैं। ईरानी कार्रवाई के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।

भारत ने जारी की एडवाइजरी

ईरान-इजराइल जंग के मद्देनजर तनाव बढ़ने पर भारत ने अपने नागरिकों को ईरान की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सलाह दी। विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी कर ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने का भी आग्रह किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 4,000 से अधिक भारतीय नागरिक रह रहे हैं।

एफएंडओ पर सेबी की सख्ती

भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) की ओर से डेरिवेटिव्स यानी फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (एफएंडओ) को लेकर नए नियम बनाए गए हैं। सेबी द्वारा इंडेक्स डेरिवेटिव में कॉन्ट्रैक्ट साइज की मिनिमम वैल्यू को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही वीकली एक्सपायरी को प्रति एक्सचेंज एक इंडेक्स तक सीमित कर दिया है। ऐसे में अब एक एक्सचेंज की ओर से सप्ताह में एक ही एक्सपायरी देखने को मिलेगी। सेबी की ओर से यह कदम रिटेल निवेशकों द्वारा डेरिवेटिव सेगमेंट में लगातार किए जा रहे नुकसान के बीच लिया गया है।

कच्चे तेल की कीमतें

ग्लोबली टेंशन की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। तेल की कीमतों में वृद्धि भारत जैसे कमोडिटी के आयातकों के लिए नकारात्मक है, क्योंकि कच्चे तेल का देश के आयात बिल में महत्वपूर्ण योगदान है। ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 75 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 72 डॉलर के ऊपर पहुंच गया, दोनों बेंचमार्क पिछले तीन दिनों में लगभग 5% बढ़ गए हैं।

चीन का फैक्टर

पिछले सप्ताह चीन सरकार द्वारा आर्थिक प्रोत्साहन उपायों की घोषणा के बाद विश्लेषकों ने चीन के शेयरो मार्केट में निरंतर वृद्धि की भविष्यवाणी की है। इससे डर है कि भारत में बिकवाली को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय इक्विटी से 15,370 करोड़ रुपये निकाले हैं।

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