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टॉप-10 कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹35,439 करोड़ घटी: SBI टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹12,692 करोड़ कम हुई; रिलायंस का मार्केट कैप भी घटा

टॉप-10 कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹35,439 करोड़ घटी:  SBI टॉप लूजर रही, इसकी वैल्यू ₹12,692 करोड़ कम हुई; रिलायंस का मार्केट कैप भी घटा

Last Updated on दिसम्बर 28, 2025 20:38, अपराह्न by Pawan

 

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 35,439 करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी है।

 

SBI का मार्केट कैप 12,692 करोड़ रुपए घटकर ₹8.92 लाख करोड़ पर आ गया। वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू ₹8,254 करोड़ घटकर ₹21.09 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं बजाज फाइनेंस की मार्केट वैल्यू ₹5,102 करोड़ घटकर ₹6.22 लाख करोड़ पर आ गई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, ICICI बैंक, LIC और TCS की वैल्यू भी घटी है।

वहीं HDFC बैंक का मार्केट कैप 10,126 करोड़ रुपए बढ़कर ₹15.26 लाख करोड़ पर पहुंच गया है। इंफोसिस की वैल्यू 6,626 करोड़ रुपए बढ़कर ₹6.87 लाख करोड़ पर आ गई है। भारती एयरटेल की मार्केट वैल्यू भी 5,359 करोड़ रुपए बढ़ी है, यह 12.00 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

 

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