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देश के टॉप 10% लोगों के पास 65% संपत्ति: कमाई का भी 58% हिस्सा; 100 पुरुषों के मुकाबले केवल 15.7% महिलाओं के पास रोजगार

देश के टॉप 10% लोगों के पास 65% संपत्ति:  कमाई का भी 58% हिस्सा; 100 पुरुषों के मुकाबले केवल 15.7% महिलाओं के पास रोजगार

Last Updated on दिसम्बर 11, 2025 22:06, अपराह्न by Pawan

 

भारत में आय और संपत्ति की असमानता रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। वर्ल्ड इनइक्वालिटी रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत की नेशनल इनकम का 58% हिस्सा टॉप 10% अमीर लोगों के पास चला जाता है, जबकि नीचे की 50% आबादी को महज 15% ही मिलता है।

 

संपत्ति के मामले में भी यहीं हाल है। टॉप 10% के पास 65% संपत्ति है और टॉप 1% के पास करीब 40%। रिपोर्ट बुधवार को रिलीज हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति औसत सालाना आय (PPP) 6.56 लाख रुपए है। इसमें टॉप 10% को 58% इनकम का शेयर मिलता है। 2021 में ये 57% थी।

देश के टॉप 10% लोग ₹10.58 करोड़ के मालिक

दूसरी तरफ, बॉटम 50% को सिर्फ 15% हिस्सा, जो पहले 13% था। वेल्थ में असमानता और भी ज्यादा है। यहां टॉप 10% के पास कुल संपत्ति का 65% है। वहीं, प्रति व्यक्ति औसत संपत्ति 29.62 लाख रुपए है। 50% आबादी के पास प्रति व्यक्ति सिर्फ 6.88 लाख रुपए की औसत संपत्ति है।

वहीं टॉप के 10% लोग 10.58 करोड़ रुपए संपत्ति के मालिक है। टॉप 0.001% (करीब 56,000 लोग) के पास तो प्रति व्यक्ति 10 करोड़ यूरो (करीब 1058 करोड़ रुपए) से ज्यादा की वेल्थ है।

इस रिपोर्ट को 200 से ज्यादा लोग तैयार करते हैं। रिपोर्ट के एडिटर्स- ल्यूकस चांसल, रिकार्डो गोमेज कैररा, रोवाइदा मोशरिफ और थॉमस पिकेटी ने इस रिपोर्ट के लिए डेटा 180 देशों से कलेक्ट किया।

फीमेल लेबर पार्टिसिपेशन रेट सिर्फ 15.7%

भारत में फीमेल लेबर पार्टिसिपेशन रेट सिर्फ 15.7% है। यानी 100 पुरुष की तुलना में केवल 15.7 महिलाओं के पास ही रोजगार है। ये हाल पिछले दशक में जस का तस है। ग्लोबल लेवल पर महिलाएं टोटल लेबर इनकम का महज 25% हिस्सा ले पाती हैं।

भारत टॉप इनइक्वालिटी वाले देशों में

पूरी दुनिया की बात करें तो टॉप 10% लोगों के पास 75% संपत्ति है, जबकि 50% निचले तबके के पास सिर्फ 2% संपत्ति ही है। इनकम में 53% हिस्सेदारी 10% लोग ले जाते हैं। वहीं, बॉटम 50% को 8% ही मिल पाता है।

लेकिन भारत इसमें सबसे ऊपर है- दक्षिण अफ्रीका के बाद, जहां टॉप 10% को 66% इनकम और 85% वेल्थ मिलती है। लैटिन अमेरिका के देश जैसे ब्राजील, मैक्सिको में भी टॉप 10% को 60% इनकम। यूरोप में स्वीडन, नॉर्वे जैसे देश बेहतर हैं, जहां बॉटम 50% को 25% इनकम मिलती है।

1980 में भारत की आबादी ग्लोबल मिडिल 40% में ज्यादा थी, लेकिन 2025 तक लगभग पूरी बॉटम 50% में खिसक गई। चीन ऊपर चढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि नॉर्थ अमेरिका और ओशिनिया में वेल्थ ग्लोबल एवरेज से 338% ज्यादा है, जबकि साउथ एशिया जैसे भारत में काफी नीचे। कार्बन एमिशन में भी गैप- टॉप 10% 77% एमिशन के जिम्मेदार, बॉटम 50% सिर्फ 3%।

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