Uncategorized

नवंबर में रिटेल महंगाई बढ़कर 0.71% के स्तर पर पहुंची: सब्जियों-मसालों की कीमतें बढ़ने का असर, पिछले महीने अक्टूबर में ये 0.25% पर थी

नवंबर में रिटेल महंगाई बढ़कर 0.71% के स्तर पर पहुंची:  सब्जियों-मसालों की कीमतें बढ़ने का असर, पिछले महीने अक्टूबर में ये 0.25% पर थी

Last Updated on दिसम्बर 12, 2025 19:17, अपराह्न by Pawan

 

नवंबर में रिटेल महंगाई पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 0.71% के स्तर पर आ गई है। इससे पहले अक्टूबर में ये 0.25% पर थी, जो 19 साल में सबसे कम स्तर रहा था।

 

नवंबर महीने में महंगाई में बढ़ोतरी सब्जियों, अंडें, मांस-मछली, मसालों, फ्यूल और लाइट की कीमतें बढ़ने की वजह से हुई है। सरकार ने शुक्रवार, 12 दिसंबर को महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं।

नवंबर में खाने-पीने के सामानों की कीमत बढ़ी

  • महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महीने-दर-महीने की महंगाई माइनस 5.02% से बढ़कर माइनस 3.91% हो गई है।
  • नवंबर महीने में ग्रामीण महंगाई दर -0.25% से बढ़कर माइनस 0.10% हो गई है। वहीं शहरी महंगाई 0.88% से बढ़कर 1.40% पर आ गई है।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिटेल महंगाई

महीना महंगाई दर
अप्रैल 3.16%
मई 2.82%
जून 2.10%
जुलाई 1.61%
अगस्त 2.07%
सितंबर 1.44%
अक्टूबर 0.25%
नवंबर 0.71%

अक्टूबर में रिटेल महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई थी। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में कमी थी। ये वर्तमान CPI सीरीज में अब तक की सबसे कम महंगाई थी। यानी, ये करीब 14 साल का निचला स्तर रहा था। इससे पहले सितंबर में ये 1.44% पर थी।

भारत में CPI की मौजूदा सीरीज 2012 के बेस ईयर पर बेस्ड है। मतलब, 2012 की कीमतों को 100 मानकर तुलना की जाती है। पहले 2010 या 1993-94 वाली सीरीज थीं, लेकिन समय के साथ अपडेट होती रहती है ताकि आंकड़े सही रहें। हर नई CPI सीरीज में बेस ईयर चेंज होता है।

CPI सीरीज यानी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सीरीज। ये महंगाई मापने का सरकार का सिंपल तरीका है। आसान शब्दों में कहे तो, ये बताता है कि रोजमर्रा की चीजें जैसे दूध, सब्जी, पेट्रोल कितनी महंगी या सस्ती हो रही हैं। बेस ईयर से तुलना करके % में आंकड़ा आता है।

बेस ईयर क्या होता है?

बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।

उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है?

  • सरकार आमतौर पर हर 5-10 साल में नया बेस ईयर चुनती है।
  • ये ऐसा साल होता है जो सामान्य हो, न ज्यादा सूखा हो, न महामारी, न ज्यादा महंगाई।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

 

Source link

Click to comment

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Most Popular

To Top