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बिकवाली, रुपये की गिरावट और वैश्विक हलचल के बावजूद स्थिर रही आर्थिक स्थिति, क्या है साल का सबक?

बिकवाली, रुपये की गिरावट और वैश्विक हलचल के बावजूद स्थिर रही आर्थिक स्थिति, क्या है साल का सबक?

Last Updated on दिसम्बर 28, 2025 11:48, पूर्वाह्न by Khushi Verma

नवभारत टाइम्स

इस साल घरेलू बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दुनिया में व्यापार से जुड़े तनाव, निवेशकों विदेशी की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के असर से बाजार में कई बार उतार-चढ़ाव आया। लेकिन भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति कुल मिलाकर स्थिर बनी रही।

शेयर बाजार इस साल एक सीमित दायरे में रहा।
 
मोतीलाल ओसवाल
वर्ष 2025 को भारतीय शेयर बाजार के लिए धैर्य और स्थिरता के साल के रूप में याद किया जाएगा। वैश्विक अनिश्चितता और बदलते आर्थिक संकेतों ने निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ली। दुनिया में व्यापार से जुड़े तनाव, निवेशकों विदेशी की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के असर से बाजार में कई बार उतार-चढ़ाव आया। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि घरेलू निवेशक लगातार बाजार में बने रहे। उनकी मजबूती और भरोसे ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को काफी हद तक संभाल लिया और बाजार को गिरने से बचाए रखा।

धीमी रफ्तार

इन चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति कुल मिलाकर स्थिर बनी रही। हालांकि कुछ सेक्टरों में मुनाफे की रफ्तार धीमी पड़ने से साल के ज्यादातर समय शेयर बाजार एक सीमित दायरे में ही घूमता रहा। उत्साह बढ़ाने वाली बात यह रही कि साल बीतने के साथ बाजार का मूड बेहतर होता गया। दिसंबर की शुरुआत तक निफ्टी ने ज्यादातर नुकसान की भरपाई कर ली थी। इसने 26,325 के नए शिखर को छुआ। यही उम्मीद है कि साल का अंत भी यह एक नए कीर्तिमान पर पहुंच कर करे

फंडामेंटल्स पर ध्यान

विभिन्न क्षेत्रों में बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। इससे यह बात फिर साबित हुई कि वैल्यूएशन पर ध्यान देना कितना जरूरी है। पूरे बाजार की तेजी से ज्यादा अहमियत विभिन्न स्टॉक के फंडामेंटल्स की है। मिड कैप स्टॉक्स ने कमोबेश मजबूती दिखाई, जबकि स्माल कप में ज्यादा उतार-चढ़ाव व अस्थिरता देखी गई। इस साल अभी तक निफ्टी मिडकैप 100 ने करीब 6% का रिटर्न दिया है। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 करीब इतना ही गिरा है।

कमाई कम

कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों ने इस बार बाजार की दिशा तय की। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बाजार को सहयोग देने वाली रही। जब वैश्विक परिस्थितियां मुश्किल भरी थीं, तब RBI ने ब्याज दरों में कमी की और पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराई। इससे बाजार को सहारा मिला। हालांकि कमाई मंदी है। मौजूदा वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में साल दर साल कमाई में केवल 2% की बढ़ोत्तरी हुई यह लगातार छठी तिमाही है, जब निफ्टी 50 ने इकाई अंक में प्रॉफिट ग्रोथ दी है।

नीतिगत प्राथमिकता बदली

कई वर्षों तक पूजीगत खर्च पर जोर देने के बाद सरकार ने खपत बढ़ाने पर ध्यान दिया है। सरकार ने टैक्स में राहत दी, GST के पूरे ढांचे में बदलाव किया, जरूरी चीजों पर करों में कटौती की और आठवें वेतन आयोग को भी लागू कर सकती है। इसका मकसद घरेलू मांग को बढ़ाना और आम लोगों को खर्च में सहारा देना है। GST 2.0 इस साल के सबसे अहम सुधारों में से एक है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार टैक्स व्यवस्था को सरल बनाना, टैक्स नियमों का बेहतर पालन और व्यापार की मुश्किलों को दूर करना चाहती है।

डिफेंस में कमाल

2025 में कई सेक्टर ने अच्छा किया। सरकारी नीतियों और स्ट्रक्चरल ग्रोथ से सहारा मिला। सबसे बेहतर करने वालों में रहा डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर। इसके स्टॉक्स में 50% 70% की तेजी रही। इसकी वजह रही ज्यादा ऑर्डर, अधिक बजट और भू-राजनीतिक तनाव के बीच स्वदेशी पर जोर कैपिटल गुड्स 40- 55% तक चढ़ा। मेटल्स सेक्टर को वैश्विक स्तर पर मजबूत कीमतों और मांग में सुधार की उम्मीदों से सहारा मिला। ऑटो और EV के शेयरों में 21% से 50% तक की तेजी आई।

फाइनैंशल बना सहारा

टेलिकॉम सेक्टर के शेयरों ने 30-45% तक का मजबूत रिटर्न दिया। इसकी वजह टैरिफ में बढ़ोतरी और कंपनियों का मुनाफा बढ़ना रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बेहतर मार्जिन का फायदा मिला। न्यू एज डिजिटल कंपनियों के शेयरों में 30-40% तक की रिकवरी देखने को मिली, क्योंकि टेक्नॉलजी पर खर्च बढ़ा है और AI को लोग तेजी से अपना रहे हैं। फाइनैंशल सेक्टर बाजार का आधार बना हुआ है। क्रडिट ग्राथ के फिर से तेजी पकड़ने, एसेट क्वॉलिटी में सुधार, क्रेडिट कास्ट में कमी और समर्थक नीतियों की वजह से PSU बैंक व चुनिंदा NBFCs ने अच्छा प्रदर्शन किया।

साल का सबक

प्राइमरी मार्केट के लिए भी यह साल ऐतिहासिक रहा। 90 से ज्यादा IPO जारी हुए और इनके जरिए 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। न्यू एज कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षित किया। यह दर्शाता है कि भारत में बिजनेस के लिए जो माहौल बना है, उस पर भरोसा बढ़ रहा है। नए साल में भी माहौल सकारात्मक बना हुआ है। कमाई को लेकर स्पष्टता, सहायक नीतियां और विदेशी निवेशकों के फिर से आने की उम्मीद मजबूत आधार तैयार कर रही है। रिटेल निवेशकों के लिए 2025 का सबक साफ है अनुशासन बनाए रखें, क्वॉलिटी बिजनेस पर ध्यान दें और लंबे निवेश पर ध्यान लगाएं।

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