Last Updated on अक्टूबर 10, 2025 16:38, अपराह्न by Pawan
Metal Stocks: शेयर बाजार में शुक्रवार 10 अक्टूबर को जहां चौतरफा तेजी का माहौल रहा। वहीं दूसरी ओर मेटल कंपनियों के शेयर बुरी तरह धड़ाम हो गए। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। इसके साथ ही यह दिन का इकलौता लाल निशान में कारोबार करता हुआ सेक्टोरल इंडेक्स बन गया। सुबह 11:30 बजे के आसपास निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 1.25 फीसदी लुढ़ककर 10,206.40 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
कौन-कौन से शेयर सबसे ज्यादा टूटे?
हिंदुस्तान कॉपर के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। कारोबारा के दौरान यह शेयर करीब 6 फीसदी फिसलकर 343.60 रुपये के स्तर पर आ गए। हिंदुस्तान जिंक के शेयर लगभग 4 फीसदी टूटे और 493.50 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। इसके अलावा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और नेशनल एल्युमिनियम कंपनी (NALCO) के शेयरों में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट देखने को मिली। NMDC, जिंदल स्टील एंड पावर और टाटा स्टील में भी करीब 2 फीसदी की गिरावट रही।
वेदांता, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और JSW स्टील जैसे दिग्गज शेयरों में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। वहीं वेलस्पन कॉर्प के शेयर मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में थे। हालांकि अदाणी एंटरप्राइजेज, APL अपोलो ट्यूब्स और जिंदल स्टेनलेस स्टील के शेयर इस गिरावट से बचते हुए हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
मेटल शेयरों में इस गिरावट के पीछे 4 बड़े कारण बताए जा रहे हैं-
1. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
मेटल कंपनियों के शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। भारतीय रुपये गुरुवार को डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 88.70 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह स्तर उसके अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹88.80 के बेहद करीब है। चूंकि ग्लोबल स्तर पर सभी प्रमुख कमोडिटीज की कीमतें डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर के मजबूत होने से ये मेटल्स बाकी करेंसी धारकों के लिए महंगे हो जाते हैं। इसका सीधा असर भारतीय मेटल कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।
2. चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर
हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गुरुवार को चांदी के वायदा भावों में तेज गिरावट आई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी का भाव 276 रुपये घटकर 1,46,600 रुपये प्रति किलो पर आ गया। जबकि मार्च और मई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में 0.5% और जुलाई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में 1.5% की गिरावट दर्ज हुई।
सितंबर एक्सपायरी वाली चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स में तो करीब 3% की गिरावट आई। इस गिरावट का सबसे अधिक असर हिंदुस्तान जिंक पर पड़ा, जो देश की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक कंपनी है।
3. गाजा युद्धविराम सौदे से घटा सेफ-हेवन डिमांड
मेटल शेयरों में गिरावट का एक और अहम कारण मिडिल-ईस्ट में शांति के संकेत रहे। खबरों के मुताबिक, इजराइल और हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में एक युद्धविराम और बंधक सौदे पर सहमति जताई है। इस संभावित समझौते से निवेशकों की रुचि “सेफ-हेवन” यानी सुरक्षित निवेश जैसे मेटल्स से हटकर अधिक जोखिम वाले एसेट्स की ओर मुड़ सकती है। इसका असर सोना-चांदी समेत इंडस्ट्रियल धातुओं की मांग पर भी पड़ा है।
4. प्रॉफिट बुकिंग ने बढ़ाई गिरावट
मेटल शेयरों में एक दिन पहले 9 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स गुरुवार 2 फीसदी से अधिक उछल गया था। लगातार तीन दिनोंरों की गिरावट के बाद इस उछाल के चलते निवेशकों ने आज मुनाफा वसूली का रास्ता अपनाया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालिया तेजी केवेदांता, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और JSW स्टील जैसे दिग्गज शेयरों में भी लगभग 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। वहीं वेलस्पन कॉर्प के शेयर मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में थे। हालांकि अदाणी एंटरप्राइजेज, APL अपोलो ट्यूब्स और जिंदल स्टेनलेस स्टील के शेयर इस गिरावट से बचते हुए हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
मेटल शेयरों में इस गिरावट के पीछे 4 बड़े कारण बताए जा रहे हैं-
1. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
मेटल कंपनियों के शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। भारतीय रुपये गुरुवार को डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 88.70 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह स्तर उसके अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹88.80 के बेहद करीब है। चूंकि ग्लोबल स्तर पर सभी प्रमुख कमोडिटीज की कीमतें डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर के मजबूत होने से ये मेटल्स बाकी करेंसी धारकों के लिए महंगे हो जाते हैं। इसका सीधा असर भारतीय मेटल कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।
2. चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर
हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद गुरुवार को चांदी के वायदा भावों में तेज गिरावट आई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी का भाव 276 रुपये घटकर 1,46,600 रुपये प्रति किलो पर आ गया। जबकि मार्च और मई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में 0.5% और जुलाई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में 1.5% की गिरावट दर्ज हुई।
सितंबर एक्सपायरी वाली चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स में तो करीब 3% की गिरावट आई। इस गिरावट का सबसे अधिक असर हिंदुस्तान जिंक पर पड़ा, जो देश की सबसे बड़ी चांदी उत्पादक कंपनी है।
3. गाजा युद्धविराम सौदे से घटा सेफ-हेवन डिमांड
मेटल शेयरों में गिरावट का एक और अहम कारण मिडिल-ईस्ट में शांति के संकेत रहे। खबरों के मुताबिक, इजराइल और हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में एक युद्धविराम और बंधक सौदे पर सहमति जताई है। इस संभावित समझौते से निवेशकों की रुचि “सेफ-हेवन” यानी सुरक्षित निवेश जैसे मेटल्स से हटकर अधिक जोखिम वाले एसेट्स की ओर मुड़ सकती है। इसका असर सोना-चांदी समेत इंडस्ट्रियल धातुओं की मांग पर भी पड़ा है।
4. प्रॉफिट बुकिंग ने बढ़ाई गिरावट
मेटल शेयरों में एक दिन पहले 9 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। निफ्टी मेटल इंडेक्स गुरुवार 2 फीसदी से अधिक उछल गया था। लगातार तीन दिनोंरों की गिरावट के बाद इस उछाल के चलते निवेशकों ने आज मुनाफा वसूली का रास्ता अपनाया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालिया तेजी के बाद यह गिरावट “टेक्निकल करेक्शन” के रूप में देखी जानी चाहिए। आने वाले सत्रों में डॉलर के रुख और ग्लोबल मेटल प्राइस ट्रेंड पर नजर रखना जरूरी होगा।बाद यह गिरावट “टेक्निकल करेक्शन” के रूप में देखी जानी चाहिए। आने वाले सत्रों में डॉलर के रुख और ग्लोबल मेटल प्राइस ट्रेंड पर नजर रखना जरूरी होगा।