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विदेशी निवेशकों ने दिसंबर में बाजार से ₹17,955 करोड़ निकाले: इस साल ₹1.60 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके; घरेलू निवेशकों ने ₹39,965 करोड़ इन्वेस्ट किए

विदेशी निवेशकों ने दिसंबर में बाजार से ₹17,955 करोड़ निकाले:  इस साल ₹1.60 लाख करोड़ की बिकवाली कर चुके; घरेलू निवेशकों ने ₹39,965 करोड़ इन्वेस्ट किए

Last Updated on दिसम्बर 15, 2025 1:30, पूर्वाह्न by Pawan

 

फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने दिसंबर के पहले 12 दिनों में भारतीय शेयर बाजार से ₹17,955 करोड़ (2 बिलियन डॉलर) की बिकवाली की है। NSDL डेटा के मुताबिक, 2025 में कुल निकासी ₹1.60 लाख करोड़ ($18.4 बिलियन) पहुंच गई।

 

नवंबर में ₹3,765 करोड़ का आउटफ्लो था। अक्टूबर में ₹14,610 करोड़ की खरीदारी के बाद फिर निकासी शुरू हो गई। इस तरह विदेशी निवेशक इस साल में अब तक 1.60 लाख करोड़ रुपए शेयर बाजार से निकाल चुके हैं।

रुपए की कमजोरी से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशक

मॉर्निंगस्टार के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि US में हाई इंटरेस्ट रेट्स, टाइट लिक्विडिटी और डेवलप्ड मार्केट्स में सेफ-हाई यील्ड एसेट्स की प्रेफरेंस ने सेंटिमेंट खराब किया। इंडिया की रिच वैल्यूएशन दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स से कम अट्रैक्टिव बना रही है। एंजेल वन के वकार जावेद खान ने रुपए की कमजोरी, ग्लोबल पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग, ईयर-एंड इफेक्ट और मैक्रो अनसर्टेन्टी को बिकवाली की वजह बताया है।

इस साल 5% तक गिरा रुपया

रुपया 11 दिसंबर को डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर 90.47 पर आ गया था। इससे पहले रुपए ने 4 दिसंबर को 90.43 के स्तर पर ऑल टाइम लो बनाया था। 1 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 85.70 के स्तर पर था, जो अब 90.47 के लेवल पर पहुंच गया है।

इस साल 1.60 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली

अक्टूबर में FPIs ने भारतीय इक्विटी में 14,610 करोड़ रुपए का निवेश किया था, जो जुलाई से सितंबर तक चले तीन महीनों की बिकवाली की लाइन को तोड़ने वाला था।

उस दौरान जुलाई में 17,700 करोड़, अगस्त में 34,990 करोड़ और सितंबर में 23,885 करोड़ रुपए निकाले गए थे। इस साल अब तक कुल मिलाकर विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 1.60 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है।

DIIs की खरीदारी से संभला बाजार

FPIs की निकासी के बावजूद बाजार पर असर कम पड़ा क्योंकि DIIs ने दिसंबर में ₹39,965 करोड़ की खरीदारी की। जियोजिट इन्वेस्टमेंट्स के VK विजयकुमार ने कहा कि इंडिया की स्ट्रॉन्ग ग्रोथ और अर्निंग्स आउटलुक को देखते हुए सस्टेन्ड सेलिंग अनसस्टेनेबल है। FPI सेलिंग आगे कम हो सकती है।

दिसंबर में फेड और ट्रेड डील पर टिकी उम्मीदें

आगे की राह पर नजर डालें तो दिसंबर में FPI एक्टिविटी ज्यादातर अमेरिकी फेड रिजर्व के रेट कट सिग्नल्स और भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट की प्रोग्रेस पर निर्भर करेगी। अगर ये पॉजिटिव रहे तो बाजार में वापसी हो सकती है, नहीं तो बिकवाली का सिलसिला जारी रह सकता है।

 

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