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स्टॉक मार्केट में बन रही तीन तरह की स्थितियां, जानिए तेजी में निफ्टी का लेवल क्या हो सकता है

सितंबर तिमाही में कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ, जियोपॉलिटिकल टेंशन और इंडियन मार्केट्स की ज्यादा वैल्यूएशन की वजह से अक्टूबर में निफ्टी की तेजी पर ब्रेक लगा। महाराष्ट्र चुनावों के नतीजे आने तक मार्केट में गिरावट जारी रही। इसके कई ब्रोकरेज फर्मों ने निफ्टी 50 के अगले साल के टारगेट पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है। कई ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के अपने अनुमान में कमी की है। इनक्रेड इक्विटीज ने निफ्टी के लिए टारगेट घटाकर 25,327 प्वाइंट कर दिया है। इसका मतलब है कि करेंट लेवल से निफ्टी में सिर्फ 4 सिर्फ तेजी आएगी।

बुल मार्केट में निफ्टी यहां से 17% चढ़ सकता है

अगले साल यानी 2025 में Nifty के लिए तीन तरह की स्थितियां बनती दिख रही हैं। Bulls का मानना है कि अगर स्थितियां अनुकूल रहती हैं तो इंडियन इकोनॉमी पर ग्लोबल इकोनॉमी की मुश्किलों का असर नहीं पड़ेगा। इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। मानसून की सामान्य बारिश और ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहने से इंडियन इकोनॉमी को सपोर्ट मिलेगा। मार्केट में तेजी आने पर निफ्टी में करेंट लेवल से 17.5 फीसदी तेजी दिख सकती है।

निफ्टी 25977 प्वाइंट तक पहुंच सकता है

FY25 की दूसरी छमाही में इंडिया इंक का प्रदर्शन बेहतर रह सकता है। अर्निंग्स ग्रोथ में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है। लेकिन, शहरों में कंजम्प्शन में सुस्ती के संकेत हैं। इनकम ग्रोथ में भी सुस्ती है। फूड इनफ्लेशन बेकाबू दिख रहा है। इससे FY25 में जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदी रह सकती है। ऐसे में निफ्टी इस वित्त वर्ष के अंत तक 25,977 तक पहुंच सकता है। यह करेंट लेवल से 6.8 फीसदी की तेजी होगी। इस दौरान निफ्टी का P/E 22 गुना होगा। एनालिस्ट्स का कहना है कि इस स्थिति की संभावना ज्यादा दिख रही है।

स्थितियां अनुकूल नहीं रहने पर निफ्टी सिर्फ 4 फीसदी चढ़ेगा

अगर जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने से मार्केट में उतारचढ़ाव बढ़ता है तो इसका असर मार्केट पर पड़ेगा। उधर, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर अमेरिकी सरकार की पॉलिसी में बड़ा बदलाव दिख सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया में केंद्र की गठबंधन की सरकार, अमेरिका में टैरिफ बढ़ने और क्रूड ऑयल के 105 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाने पर इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। इनक्रेड इक्विटीज का यह भी मानना है कि अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी से ऊपर रहता है तो आरबीआई के इंटरेस्ट रेट घटाने की संभावना कम रह जाएगी। इससे FY25 के अंत में निफ्टी करीब 23,379 के लेवल पर रह सकता है। यह मौजूदा स्तर से सिर्फ 4 फीसदी का रिटर्न होगा।

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