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₹79000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स पर झूमें डिफेंस स्टॉक्स, सबसे अधिक इस शेयर को फायदा मिलने की उम्मीद

₹79000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स पर झूमें डिफेंस स्टॉक्स, सबसे अधिक इस शेयर को फायदा मिलने की उम्मीद

Last Updated on अक्टूबर 24, 2025 15:30, अपराह्न by Pawan

Defence Stocks: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज बिकवाली का काफी दबाव है लेकिन मुनाफावसूली की इस आंधी में भी डिफेंस शेयरों को लेकर तगड़ा जोश दिखा। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने कई आर्मी कॉन्ट्रैक्ट्स को मंजूरी दी जिसकी टोटल वैल्यू करीब ₹79 हजार करोड़ है। इसके चलते आज डिफेंस सेक्टर की कंपनियों भारत डाएनेमिक्स (Bharat Dynamics), बीईएमएल (BEML), गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders and Engineers), कोचीन शिपयार्ड (Cochin Shipyard), पारस डिफेंस (Paras Defence), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (Bharat Electronics), मझगांव डॉक (Mazagon Dock) और मिश्र धातु (Mishra Dhatu) के शेयर करीब 3% तक उछल पड़े। इस साल 2025 में अब तक गार्डन रीच शिपबिल्डर्स के शेयर 63%, भारत डाएनेमिक्स 39% और बीईएल 9% उछल चुके हैं। कोचीन शिपयार्ड के भी शेयर इस साल करीब 19% और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 43.89% ऊपर चढ़ चुका है।

सबसे अधिक किस कंपनी को मिलेगा फायदा?

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने करीब ₹79 हजार करोड़ के कई सैन्य कॉन्ट्रैक्ट्स को मंजूरी दी है। घरेलू ब्रोकरेज फर्म ICICI डायरेक्ट रिसर्च के मुताबिक इससे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, भारत डाएनेमिक्स, जीआरएसई समेत अन्य दिग्गज घरेलू डिफेंस कंपनियों को फायदा मिलेगा। डीएसी की मंजूरी का सबसे अधिक फायदा भारत डाइनेमिक्स को फायदा मिलने की उम्मीद है। यह हल्के वजन वाली टारपीडो और नाग मिसाइल सिस्टम भी बनाती है। बीईएल ग्राउंड बेस्ड मोबाइल ईएलआईएनटी सिस्टम (GBMES) बनाती है। वहीं बीईएमएल मैटेरियल हैंडलिंग क्रेन वाले हाई मोबिलिटी वेईकल्स (HMVs) बनाती है तो गार्डन रीच शिपबिल्डर्स 30मिमी के नेवल सर्फेस गन (NSG) बनाती है।

Operation Sindoor के बाद दूसरा अहम फैसला, बदले कुछ प्रावधान भी

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हथियारों की खरीदारी को लेकर करीब ₹79 हजार करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स को जो मंजूरी दी है, वह ऑपरेशन सिंदूर के बाद दूसरा अहम फैसला है। इसके अलावा मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने नया डिफेंस प्रोक्यूरमेंट मैनुअल (DPM) पेश किया है जिसका फोकस रेगुलेटरी प्रोसेसेज को आसान करने पर है। फैसले लेने में तेजी लाने और कारोबारी सुविधा को बढ़ावा देने के लिए कुछ प्रमुख प्रावधानों में बदलाव किया गया है। स्टोर्स और सर्विसेज में देरी से डिलीवरी पर लगने वाले लिक्विडेटेड डैमेजेज (LD) में ढील दी गई है। अब सिर्फ अत्यधिक दरी वाले मामलों में ही अधिकतम 10% का लिक्विडेटेड डैमेजेज लगाया जाएगा। स्वदेशी मामले में तो इसमें और ढील दी गई है और अन्य मामले में लागू 0.5% प्रति सप्ताह के एलडी की बजाय सिर्फ प्रति सप्ताह 0.1% एलडी लगाया जाएगा।

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