Last Updated on जुलाई 14, 2025 17:04, अपराह्न by
बीएसई और एनएसई के निवेशकों को पिछले एक महीने में भारी नुकसान हुआ है। इसके कई कारण हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण Jane Street घोटाला है। सेबी ने इस कंपनी के भारतीय बाजार में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी है। कंपनी पर साजिश करने का आरोप है।
शेयरों में गिरावट
BSE के शेयर 10 जून को 3,030 रुपये के शिखर से 22% गिरकर 2,376 रुपये पर आ गए हैं। इससे बाजार में 26,600 करोड़ रुपये की कमी आई है। WWIPL के आंकड़ों के अनुसार, NSE को 1.15 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसके शेयर 21 जून को 2,590 रुपये के उच्च स्तर से 18% गिरकर 2,125 रुपये पर आ गए हैं। WWIPL अनलिस्टेड शेयरों का कारोबार करती है।
अब बाजार के विश्लेषकों ने एक्सचेंज शेयरों की रेटिंग घटानी शुरू कर दी है। IIFL Capital ने BSE की रेटिंग घटाकर ADD कर दी है। उनका कहना है कि निकट भविष्य में वॉल्यूम में कमी आ सकती है। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि बाजार में मौजूदा अनिश्चितता से निकट भविष्य में एक्सचेंज वॉल्यूम पर असर पड़ेगा।” पिछले महीने Motilal Oswal ने भी BSE की रेटिंग घटाकर न्यूट्रल कर दी थी। उन्होंने साप्ताहिक अनुबंधों की समाप्ति में बदलाव के बाद बाजार हिस्सेदारी खोने की आशंका जताई थी।
बैन का असर
Geojit Investments Limited के चीफ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा, “BSE अपने रेकॉर्ड शिखर से लगभग 22% गिर गया है। पिछले पखवाड़े में लगातार गिरावट से ऐसा लग रहा है कि स्टॉक पूरी तरह से बियर ट्रेंड में प्रवेश कर गया है।” Jane Street पर प्रतिबंध का सीधा असर हुआ।
Nifty के साप्ताहिक अनुबंधों की पहली समाप्ति पर NSE पर कुल कारोबार पिछले समाप्ति दिवस की तुलना में 21% गिर गया। इंडेक्स ऑप्शंस का कारोबार 472.5 ट्रिलियन रुपये रहा, जो 3 जुलाई को 601 ट्रिलियन रुपये था। NSE पर कुल प्रीमियम कारोबार मध्य मार्च के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया। यह इस साल के औसत से लगभग 40% कम था।