Last Updated on मार्च 10, 2025 10:48, पूर्वाह्न by Pawan
IndusInd Bank Shares: इंडसइंड बैंक के शेयर आज 10 मार्च को कारोबार के दौरान करीब 5% तक गिरकर पिछले एक साल के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब कई ब्रोकरेज फर्मों और एनालिस्ट्स ने इंडसइंड बैंक के शेयरों की रेटिंग और टारगेट प्राइस दोनों में कटौती की है। ऐसा तब हुआ रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंक के मौजूदा सीईओ सुमंत कठपालिया के कार्यकाल को एक साल तक बढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी है। जबकि बोर्ड ने सीईओ के लिए 3-साल का कार्यकाल विस्तार मंजूर कर लिया था। शेयर बाजार में बढ़ते दबाव और बैंक के प्रदर्शन को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
इंडसइंड बैंक के शेयर सोमवार को कारोबार की शुरुआत में करीब 5% गिरकर ₹881.10 पर आ गए थे। यह इसका पिछले 52 सप्ताह का निचला स्तर है। फिलहाल शेयर में इसके 1,576 रुपये के हालिया शिखर से करीब 40% से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
एनालिस्ट्स की चिंताएं और डाउनग्रेड
UBS ने इंडसइंड बैंक के शेयरों की रेटिंग को “Buy” से घटाकर “Sell” कर दिया और टारगेट प्राइस को 1,090 रुपये से घटाकर 850 रुपये कर दिया। ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुमंत कठपालिया के कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला निकट अवधि में अर्निंग्स के लिहाज से नकारात्मक है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस दौरान बैंक का ध्यान नियामक दिशानिर्देशों को पूरा करने पर फोकस होगा, जिससे रणनीतिक दिशा में कमी और ग्रोथ में सुस्ती आ सकती है। यूबीएस ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बैंक के अर्निंग प्रति शेयर (EPS) अनुमान को 10.5 प्रतिशत तक कम कर दिया।
इसी तरह, गोल्डमैन सैक्स ने भी बैंक के शेयरों की रेटिंग को “Buy” से घटाकर “न्यूट्रल” कर दिया है और टारगेट प्राइस 964 रुपये तय किया है। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि सीईओ के कार्यकाल में एक साल का विस्तार, मैनेजमेंट के बदलाव पर स्पष्टता को टालता है, और निवेशक अब बैंक के मौजूदा लीडरशिप के तहत ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर ध्यान देंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बैंक कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
बैंक का हालिया प्रदर्शन
पिछले कुछ तिमाहियों से इंडसइंड बैंक को रिटेल लेंडिंग, खासतौर से माइक्रोफाइनेंस (MFI) और ऑटो फाइनेंस सेगमेंट में ग्रोथ बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दिसंबर 2024 की तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 1,401 करोड़ रुपये रहा, हालांकि यह एनालिस्ट्स के 1,271 करोड़ रुपये के अनुमान से बेहतर था। एसेट क्वालिटी में भी कमजोरी देखी गई, जिसमें ग्रॉस एनपीएस 2.25 प्रतिशत तक पहुंच गई।
एनालिस्ट्स का कहना है कि बैंक की डिपॉजिट ग्रोथ और क्रेडिट लागत अभी भी प्रमुख चिंता के क्षेत्र हैं। हाल के महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अपनी हिस्सेदारी को 55.53 प्रतिशत (सितंबर 2024) से घटाकर 46.63 प्रतिशत (दिसंबर 2024) कर दिया, जिससे शेयरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
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