Last Updated on जून 7, 2025 9:40, पूर्वाह्न by
Amazon Layoffs: एमेजॉन में एक बार फिर नौकरियां गई हैं। इस बार छंटनी इसकी बुक्स डिवीजन में हुई है, जिसमें गुडरीड्स रिव्यू साइट और किंडल यूनिट भी शामिल हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिएटल स्थित एक रिटेलर का कहना है कि 100 से कुछ कम कर्मचारी इस छंटनी से प्रभावित हुए हैं। यह कदम एफिशिएंसी में सुधार और संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए उठाया गया है। इस छंटनी के बारे में सबसे पहले रिपोर्ट बिजनेस इनसाइडर ने दी थी।
एमेजॉन के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा, ‘अपनी टीम्स और प्रोग्राम्स को अधिक कुशलता से संचालित करने और अपने बिजनेस रोडमैप के साथ बेहतर तालमेल बनाने के लिए हमारे चल रहे काम के हिस्से के रूप में, हमने बुक्स डिवीजन के अंदर कुछ रोल्स को खत्म करने का कड़ा फैसला किया है।’
नौकरशाही कम करने की कोशिश में CEO एंडी जेसी
Amazon धीरे-धीरे नौकरियों में कटौती कर रही है। हाल ही में इसकी डिवाइस और सर्विसेज यूनिट, वंडरी पॉडकास्ट डिवीजन, स्टोर्स और कम्युनिकेशंस स्टाफ की छंटनी की गई थी। कंपनी के सीईओ एंडी जेसी कंपनी में नौकरशाही की अधिकता को कम करने के लिए एक पहल कर रहे हैं, जिसके तहत मैनेजर्स की संख्या कम करना भी शामिल है। रॉयटर्स के मुताबिक, पिछले महीने के एक खुलासे के अनुसार, साल 2025 की पहली तिमाही यानि जनवरी-मार्च के दौरान Amazon ने 2024 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही की तुलना में लगभग 4,000 नौकरियां एड कीं।
BIS करने वाला है एमेजॉन-फ्लिपकार्ट पर मुकदमा
एक अन्य खबर के मुताबिक, भारत में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ई-कॉमर्स कंपनियों- एमेजॉन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ मुकदमा दायर करने की तैयारी में है। BIS का आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी संख्या में ऐसे प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं, जो अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन के बिना थे। ये सामान क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) का उल्लंघन कर रहे थे। यह मामला मार्च 2025 में की गई छापेमारी के बाद सामने आया है।
छापे के दौरान BIS Act 2016 के तहत हजारों की संख्या में ऐसे प्रोडक्ट जब्त किए गए। Amazon (चेन्नई) के गोदाम से 3,000 से ज्यादा प्रोडक्ट जब्त किए गए थे। इनमें इंसुलेटेड फ्लास्क, फूड कंटेनर, मेटलिक वाटर बॉटल, सीलिंग फैन और टॉयज शामिल थे। कुल वैल्यू लगभग ₹36 लाख बताई गई। BIS अब एमेजॉन और फ्लिपकार्ट से जब्त किए गए सामान के मूल्य का 10 गुना तक मुआवजा मांग सकता है। साथ ही, इन कंपनियों के खिलाफ आपराधिक मामला भी दायर कर सकता है।