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दावा-भारत में रूस से 30 गलत पहचान वाले जहाज पहुंचे: इनसे 54 लाख टन कच्चा तेल आयात हुआ; भारत फॉल्स-फ्लैग जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना

दावा-भारत में रूस से 30 गलत पहचान वाले जहाज पहुंचे:  इनसे 54 लाख टन कच्चा तेल आयात हुआ; भारत फॉल्स-फ्लैग जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना

Last Updated on नवम्बर 27, 2025 20:06, अपराह्न by Pawan

 

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूस से तेल आयत बढ़ा दिया था। (इमेज AI जनरेटेड है)

फिनलैंड के थिंक टैंक CREA ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने 54 लाख टन रूसी कच्चा उन 30 जहाजों से आयात किया, जो गलत पहचान (फॉल्स फ्लैग) का इस्तेमाल कर भारत पहुंचे।

 

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने कहा कि भारत ने जनवरी से सितंबर 2025 के बीच ये तेल आयात किया। इस अवधि में भारत दुनिया भर में ऐसे गलत पहचान से तेल ले जाने वाले जहाजों की सबसे बड़ी मंजिल बना।

प्रतिबंधों से बचने बचने रूस ने शैडो फ्लीट भेजे

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस ने अपने शैडो फ्लीट यानी पुराने, बिना मालिकाना हक वाले और ट्रैकिंग सिस्टम बंद वाले जहाजों का उपयोग बढ़ा दिया है।

CREA का दावा है कि 2025 के पहले नौ महीनों में कुल 113 रूसी जहाज फॉल्स फ्लैग के तहत संचालित हुए और उन्होंने लगभग 11 मिलियन टन 21 हजार करोड़ रुपए का कच्चा तेल ढोया। इनमें से अकेले 10 हजार करोड़ रुपए का 54 लाख टन तेल भारत पहुंचा।

4 सवाल-जवाब में भारत और रशियन ऑयल इंपोर्ट की पूरी कहानी

1. भारत ने रशियन तेल खरीदना क्यों बढ़ाया?

2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस पर सैंक्शन लगे। रूस अपना तेल बहुत सस्ता बेचने लगा। पहले भारत रूस से तेल नहीं खरीदता था, लेकिन अब रशियन क्रूड 20-30 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलने लगा। भारत की रिफाइनरी कंपनियां (रिलायंस, IOC, नायरा, HPCL) ने मौका देखा और खूब तेल खरीदा।

2023-2025 में भारत रोज 17-19 लाख बैरल रशियन क्रूड खरीदने लगा। इससे भारतीय कंपनियों को करोड़ों रुपए की बचत हुई।

2. अमेरिका और यूरोपियन यूनियन ने रूस पर क्या-क्या सैंक्शन लगाए?

  • सबसे पहले पहले रशियन क्रूड का डायरेक्ट इंपोर्ट बैन।
  • फिर रशियन क्रूड से बना पेट्रोल-डीजल भी जनवरी 2026 से EU में नहीं बिकेगा।
  • अक्टूबर 2025 में रूस की दो सबसे बड़ी कंपनियां रोसनेफ्ट और लुकोइल पर सीधा सैंक्शन। इनसे अमेरिका में बिजनेस करने वाली कंपनी कोई डील नहीं कर सकते, वरना खुद भी सैंक्शन में फंस सकते हैं।
  • बैंक ट्रांजेक्शन की सख्त जांच शुरू हुई अगर पेमेंट रोसनेफ्ट या लुकोइल को जा रहा है, तो बैंक पेमेंट रोक देगा।

3. भारत पर क्या असर पड़ा?

  • अमेरिका ने भारत पर भी 50% टैरिफ लगा दिया, क्योंकि हम रशियन तेल खरीद रहे हैं।
  • रिलायंस का यूरोप में बहुत बड़ा एक्सपोर्ट है। अगर वह रशियन क्रूड यूज करेगी तो यूरोप उसका बना पेट्रोल-डीजल नहीं लेगा।
  • अमेरिका में रिलायंस का बिजनेस है, वहां सैंक्शन लग गया तो अकाउंट फ्रीज हो सकते हैं।
  • बैंक डरे, अगर वे रशियन कंपनी को पेमेंट करेंगे तो उनका अमेरिका में अकाउंट फ्रीज हो सकता है। इसलिए बैंक हर ट्रांजेक्शन को बहुत बारीकी से चेक करने लगे।
  • IOC, HPCL, मंगलौर रिफाइनरी ने रशियन तेल खरीदना ही बंद कर दिया।

4. अब क्या हो रहा है और आगे क्या होगा?

  • नवंबर में भारत ने खूब रशियन तेल खरीदा (18.7 लाख बैरल रोज), क्योंकि स्टॉक भरना था।
  • दिसंबर में सिर्फ 6-6.5 लाख बैरल रोज आएगा 3 साल का सबसे कम।
  • रिलायंस ने 20 नवंबर से अपनी SEZ रिफाइनरी में रशियन क्रूड बंद कर दिया। 1 दिसंबर से वहां सिर्फ नॉन-रशियन तेल से फ्यूल बनेगा।
  • कंपनियां अब अल्टरनेटिव सऊदी, इराक, UAE, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल ले रहे हैं ।
  • रशियन तेल सस्ता था, अब महंगा तेल लेना पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत पर थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार इसे सब्सिडी या दूसरे तरीके से कंट्रोल रखेगी।

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