Last Updated on दिसम्बर 5, 2025 17:56, अपराह्न by Khushi Verma
Stock markets : RBI पॉलिसी के बाद बाजार में जोश देखने को मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए हैं। बैंकिंग और IT शेयरों में खरीदारी रही। ऑटो, मेटल और PSU बैंक इंडेक्स भी बढ़त पर बंद हुए। एनर्जी, स्मॉलकैप और फार्मा इंडेक्स गिरकर बंद हुए। कापोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 447 प्वाइंट चढ़कर 85,712 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 153 प्वाइंट चढ़कर 26,186 पर बंद हुआ। इंट्राडे में निफ्टी 26,200 के पार जाता दिखा। बैंक निफ्टी 489 प्वाइंट चढ़कर 59,777 पर बंद हुआ। मिडकैप 295 प्वाइंट चढ़कर 60,595 पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 24 शेयरों में खरीदारी रही। निफ्टी के 50 में से 38 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंक निफ्टी के सभी 12 शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की रेट कटौती और सेंट्रल बैंक के बॉन्ड खरीद और डॉलर-रुपये स्वैप के ज़रिए 1.45 लाख करोड़ रुपए की लिक्विडिटी डालने के प्रस्ताव से घरेलू बाज़ार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ, जिससे 5 दिसंबर, शुक्रवार को बेंचमार्क अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए। BSE मिडकैप इंडेक्स 0.21 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ, लेकिन स्मॉलकैप इंडेक्स 0.67 फीसदी गिर गया।
लार्ज और मिड-कैप में बढ़त से BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन पिछले सेशन के 470 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 471 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे इन्वेस्टर्स की वेल्थ एक ही सेशन में लगभग 1 लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा बढ़ गई।
केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर अवनीश जैन का कहना है कि अह मार्केट की नजर US FED पॉलिसी पर रहेगी, जिसमें रेट कट की उम्मीद है। कुल मिलाकर मार्केट का सेंटिमेंट पॉजिटिव लग रहा है और हम आने वाले समय में यील्ड्स को नीचे जाते हुए देख सकते हैं। USD/INR के मूवमेंट पर भी मार्केट की नज़र बनी रह सकती है। इसके अलावा बाजार की चाल रेट में नरमी, US-इंडिया ट्रेड डील के पूरा होने, US FED के एक्शन और करेंसी मूवमेंट जैसे फैक्टर्स पर निर्भर कर सकती है।
INVasset PMS के पार्टनर और फंड मैनेजर, अनिरुद्ध गर्ग का कहना है कि स्टॉक मार्केट के लिए RBI द्वारा 25 bps की रेट कट पॉजिटिव है। कम पॉलिसी रेट्स और बेहतर बैंकिंग लिक्विडिटी से क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट मिलता है, जिससे इन्वेस्टर्स का रुझान फिर से साइक्लिकल और क्रेडिट-सेंसिटिव सेक्टर्स की ओर जा सकता है। खासकर, बैंक और नॉन-बैंक फाइनेंशियल कंपनियों में नए सिरे से तेजी आ सकती है।
मिरे एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट विजय गौर का कहना है कि RBI ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 bps की कमी की है, जबकि अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखा है। इसके साथ ही FY26 के लिए अपडेटेड अनुमान भी जारी किए गए हैं। FY26 के लिए रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया गया है और FY26 के लिए CPI इन्फ्लेशन का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया गया है। इसके अलावा, RBI ने लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए दिसंबर में 1 लाख करोड़ रुपये के ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) खरीद की भी घोषणा की है। इससे NBFCs, SFBs, MFIs, ऑटो, रियल एस्टेट और गोल्ड फाइनेंसर्स जैसे क्रेडिट-सेंसिटिव सेक्टर्स को फायदा होगा। हालांकि, इससे शॉर्ट टर्म में बैंकों NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पर दबाव पड़ेगा।