Uncategorized

टॉप-10 कंपनियों में 5 की वैल्यू ₹72,286 करोड़ बढ़ी: TCS का मार्केट कैप ₹35,910 करोड़ बढ़कर ₹11.72 लाख करोड़ पहुंचा, रिलायंस का ₹35,117 करोड़ कम हुआ

टॉप-10 कंपनियों में 5 की वैल्यू ₹72,286 करोड़ बढ़ी:  TCS का मार्केट कैप ₹35,910 करोड़ बढ़कर ₹11.72 लाख करोड़ पहुंचा, रिलायंस का ₹35,117 करोड़ कम हुआ

Last Updated on दिसम्बर 7, 2025 8:48, पूर्वाह्न by Pawan

 

मार्केट वैल्यूएशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 5 की वैल्यू इस हफ्ते के कारोबार में ₹72,286 करोड़ बढ़ी है। इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)टॉप गेनर रही। कंपनी का मार्केट कैप ₹35,910 करोड़ बढ़कर ₹11.72 लाख करोड़ पहुंच गया है।

 

टेक कंपनी इंफोसिस ने अपने मार्केट कैप में 23,405 करोड़ रुपए जोड़े हैं। अब कंपनी का मार्केट कैप ₹6.71 लाख करोड़ है। वहीं, बजाज फाइनेंस ने ₹6,720 करोड़ और एयरटेल ने 3,792 करोड़ रुपए अपनी वैल्यूएशन में जोड़े हैं।

एयरटेल की वैल्यू 35,239 करोड़ रुपए गिरी

इधर, देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू 35,117 करोड़ रुपए कम होकर ₹20.85 लाख करोड़ पर आ गई है। वहीं सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) की वैल्यू ₹15,560 करोड़ गिरकर ₹5.50 लाख करोड़ रह गई है।

मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है?

मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है।

इसे एक उदाहरण से समझें…

मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी।

कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं…

बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब
शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे
पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट
पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट
हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग

मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है।

निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं।

उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

 

Source link

Click to comment

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Most Popular

To Top