Kross Ltd IPO: क्रॉस लिमिटेड का इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आज 9 सितंबर से बोली के लिए खुल गया है। यह गाड़ियों के पार्ट्स बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनियों में से एक है। कंपनी के पास ट्रेलर एक्सल और सस्पेंशन असेंबली सहित अपने प्रोडक्ट की एक लंबी सीरीज है, जिसका इस्तेमाल कमर्शियल व्हीकल औरर कंज्यूमर ट्रैक्टर्स इंडस्ट्रीज में होता है। कंपनी ने 228 से 240 रुपये प्रति शेयर के भाव पर अपना IPO लॉन्च किया है। 240 रुपये प्रति शेयर के ऊपरी भाव पर, आईपीओ का साइज 500 करोड़ रुपये आता है। वहीं कंपनी का मार्केट कैप करीब 1,548 करोड़ रुपये बैठता है।
Kross IPO से जुड़ी अन्य जानकारी को आप नीचे दिए चार्ट में देख सकते हैं-
Kross IPO: कंपनी का संक्षिप्त इतिहास
क्रॉस लिमिटेड के कमर्शियल व्हीकल्स और ट्रैक्टर्स के लिए हाई परफॉर्मेंस वाले पार्ट्स बनाने और सप्लाई करने का एक लंबा अनुभव है। यह ट्रेलर एक्सेल और संस्पेंशन के ऑर्गनाइज्ड मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ती कंपनियों में से एक है। इसके पास करीब 30 सालों का अनुभव है और जमेशदपुर में इसकी 5 फैक्ट्रियां हैं। कंपनी के अपने प्रमुख घरेलू और ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ लंबी-अवधि का रिश्ता है और हाल के सालों में इसकी ग्रोथ भी काफी अच्छी रही है।
Kross IPO: कस्टमर्स के साथ लंबी-अवधि का रिश्ता
कंपनी को अपने प्रोडक्ट की लंबी रेंज, मार्केट में व्यापक पहुंच, क्वालिटी, सेफ्टी और विश्वसनीयता के कारण ग्राहकों के साथ सफलतापूर्वक लंबी-अवधि के रिश्ते बनाए हैं। इससे पता चलता है कि कंपनी का रेवेन्यू स्रोत टिकाऊ है। साथ ही इससे नए ग्राहकों को हासिल करने या मौजूदा ग्राहकों से अतिरिक्त बिजनेस हासिल करने की लागत में भी कमी आती है। कंपनी के जिन ग्राहकों के साथ लंबी अवधि के रिश्ते हैं, उनमें अशोक लीलैंड, टाटा इंटरनेशनल, DLT प्राइवेट लिमिटेड के अलावा स्वीडन की लीक्स फालुन AB और जापान की कई OEMs शामिल हैं।
Kross IPO: मजबूत वित्तीय प्रदर्शन
कोरोना महामारी के बाद क्रॉस का वित्तीय प्रदर्शन और रेटिंग दोनों बेहतर हुआ है। वित्त वर्ष 2022 से 2024 के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में सालाना 44 फीसदी की दर से ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं इसका ऑपरेटिंग मार्जिन इस दौरान 9.9 फीसदी से बढ़कर 13 फीसदी पर पहुंच गया। कंपनी को नए ग्राहकों को हासिल करने की कम लागत, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और कुशल कास्ट मैनेजमेंट के चलते यह शानदार प्रदर्शन हासिल करने में मदद मिली।

Kross IPO: ट्रेलर एक्सल, सस्पेंशन असेंबली को बनाने में महारत
कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 में ट्रेलर एक्सल और सस्पेंशन असेंबली का इन-हाउस उत्पादन शुरू किया और तब से यह इस सेगमेंट में लगातार बढ़ रही है।

Kross IPO: डायवर्सिफाई प्रोडक्ट पोर्टफोलियो
क्रॉस लिमिटेड कई तरह के प्रोडक्ट बनाती हैं। ऐसे में इसके बिजनेस की किसी एक प्रोडक्ट पर निर्भरता नहीं है, जो अच्छी बात है। आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमताओं के साथ कंपनी के जटिल और हाई परफॉर्मेंस वाले प्रोडक्ट्स बनाती है। इसमें ढलाई करके या फोर्ज करके बनाए जाने वाले कई ऐसे भी पार्ट्स, जिनका वजन 40 किलो तक है। कंपनी के सभी अहम प्रोडक्ट की लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं-


Kross IPO: इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस
कंपनी के पास मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स हैं। साथ ही कंपनी उभरते ट्रेंडस के साथ तालमेल बिठाने, लागत को कम करने और क्वालिटी को बनाए रखने के लिए लगातार बैकवर्ड इंटीग्रेशन भी कर रही है। आंतरिक मैन्युफैक्चरिंग से कंपनी को हाई-क्वालिटी वाले जटिल और सेफ प्रोडक्ट बनाने की क्षमता बढ़ी है। इसके चलते नई कंपनियों के लिए इससे मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है।

Kross IPO: इंडस्ट्री की संभावनाएं
वित्त वर्ष 2023 में मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल (M&HCV) की बिक्री में 40 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई थी। आगे भी M&HCV सेगमेंट की ग्रोथ के अच्छे बने रहने की उम्मीद है।
Kross IPO: वैल्यूएशन
अगर वैल्यूएशन की बात करें तो, पिछले 12 महीनों की आय के आधार पर कंपनी का P/E रेशियो 34.5 गुना आता है, जो इसकी बाकी लिस्टेड कंपनियों के मुकाबले थोड़ा अधिक है। वहीं वित्त वर्ष 2026 की अनुमानित आय पर इसका P/E रेशियो करीब 25 गुना है। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, ग्रोथ संभावनाओं और मार्केट में विस्तार पर फोकस को देखते हुए, हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे लंबी-अवधि के नजरिए के साथ शेयर खरीदने के लिए करेक्शन का इंतजार करें।

Kross IPO: जोखिम
– वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का करीब 50 प्रतिशत रेवेन्यू इसके सिर्फ 3 कस्टमर्स से आया था।
– इसका करीब 43 प्रतिशत रेवेन्यू सिर्फ 2 प्रोडक्ट- ट्रेलर एक्सल और सस्पेंशन से आता है
– इसका करीब 88.87 फीसदी रेवेन्यू M&HCV सेसेगमेंट से आता है। अगर इस सेगमेंट में कोई नियामकीय बदलाव आता है, तो इसके कारोबार में मुश्किलें आ सकती है।
– कंपनी की मैन्युफैक्चरिंक्ष जमेशदपुर और झारखंड में सीमित है
– स्टील की उपलब्धता में कमी भी कंपनी के बिजनेस पर असर डाल सकती है
– नेहा गुप्ता & नितिन अग्रवाल