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बाजार में बंपर तेजी फिर भी बंधे हैं हाथ… आखिर क्‍या है माजरा? दिग्‍गज ने समझाया

नई दिल्‍ली: बीएनपी पारिबा एसेट मैनेजमेंट के चीफ मार्केट स्‍ट्रैटेजिस्‍ट डैनियल मॉरिस ने भारतीय बाजारों, अमेरिकी टेक्‍नोलॉजी शेयरों, डॉलर और सोने पर अपनी राय रखी है। मॉरिस ने बताया है कि ऊंचे वैल्‍यूएशन के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से दूर हुए हैं। उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था, फेडरल रिजर्व की दरों में कटौती की संभावना, डॉलर की मजबूती और सोने में निवेश के बारे में भी अपना आउटलुक रखा। मॉरिस ने अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद जताई।भारतीय बाजारों में पिछले 45 दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर मॉरिस ने कहा कि इसकी मुख्य वजह भारत में शेयरों का ऊंचा वैल्‍यूएशन है। कंपनियों की कमाई बढ़ी है। लेकिन, शेयरों की कीमतें उससे भी तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में या तो भारतीय बाजारों में गिरावट देखने को मिल सकती है या फिर कंपनियों की कमाई में और तेजी आनी चाहिए, जिससे शेयरों का प्राइस-टू-अर्निंग (PE) अनुपात कम हो। यही वो मुख्य कारण है जिस पर निवेशक ध्यान दे रहे हैं।

मॉरिस के अनुसार, ‘निवेशक मुख्य रूप से भारत में ऊंचे वैल्‍यूएशन को लेकर चिंतित हैं। जबकि कॉर्पोरेट आय में ग्रोथ हुई है, शेयर की कीमतें और भी तेजी से बढ़ी हैं।’

दो सत्रों से बाजार में जोरदार तेजी

एक्‍सपर्ट ने यह बात ऐसे समय में कही है जब पिछले दो सत्रों में शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली है। हालांकि, इस तेजी का ट्रिगर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी की अगुवाई वाले गठबंधन को मिली धमाकेदार जीत है। सेंसेक्स ने सोमवार को भी करीब 993 अंक की छलांग लगाई और निफ्टी भी 315 अंक चढ़ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, पूंजीगत उत्पादों, ऊर्जा और बैंक शेयरों में तगड़ी खरीदारी आने से भी निवेशकों की धारणा को मजबूती मिली। ऊंचे वैल्‍यूएशन की चिंंता और अमेर‍िकी बाजारों में मजबूती की संभावना के चलते ही शायद न‍िवेशक खुलकर दांव नहीं लगा पा रहे हैं।

अमेरिकी ब्‍याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और कटौती की संभावना पर मॉरिस ने कहा कि चुनाव से पहले, एक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का अनुमान था, जहां विकास धीमा होता, महंगाई दर कम होती और फेड दरों में कटौती करता। अब ऐसा तुरंत नहीं हो सकता, लेकिन भविष्य में हो सकता है। अभी, एक ‘नो लैंडिंग’ की स्थिति है, जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था बढ़ती रहती है, महंगाई दर ऊंची रहती है, और ब्याज दरें बढ़ने का खतरा है।

अमेरिकी डॉलर के बारे में मॉरिस का मानना है कि यह मजबूत बना रहेगा। ट्रंप के पहले कार्यकाल में और फेड की ओर से दरों में कटौती के दौरान डॉलर में तेजी आई थी।

सोने में तेजी के आसार

सोने के बारे में मॉरिस का नजरिया सकारात्मक है। भू-राजनीतिक जोखिम और अमेरिका में ऊंची महंगाई दर सोने के लिए सहायक हैं। कुछ केंद्रीय बैंक अमेरिकी ट्रेजरी के बाहर विविधता लाने की संभावना रखते हैं, जो सोने के लिए फायदेमंद है।

अमेरिकी शेयर बाजारों के बारे में मॉरिस ने कहा कि वे अमेरिकी शेयरों पर ओवरवेट हैं। ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल और फेड की ओर से दरों में कटौती के दौरान अमेरिकी शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके पीछे राजकोषीय प्रोत्साहन, ढील के साथ विलय और अधिग्रहण गतिविधि में तेजी है, जो कॉर्पोरेट मुनाफे में बढ़ोतरी का समर्थन करते हैं।

(डिस्क्लेमर: इस विश्लेषण में दिए गए सुझाव व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों के हैं, stock market news के नहीं। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श कर लें क्योंकि शेयर बाजार की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।)

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