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IATA की मानें तो 70 लाख करोड़ के धंधे में मालामाल हो जाएगीं एविएशन कंपनियां, शेयर बनेंगे राकेट – according to iata aviation companies will become rich in business worth rs 70 lakh crore – बिज़नेस स्टैंडर्ड

IATA की मानें तो 70 लाख करोड़ के धंधे में मालामाल हो जाएगीं एविएशन कंपनियां, शेयर बनेंगे राकेट – according to iata aviation companies will become rich in business worth rs 70 lakh crore – बिज़नेस स्टैंडर्ड

Last Updated on दिसम्बर 22, 2024 16:38, अपराह्न by Pawan

 

वैश्विक एयरलाइंस समूह आईएटीए के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो भारत में अपनी एथनॉल आपूर्ति और गैर-खाद्य औद्योगिक तेलों जैसे लिपिड फीडस्टॉक्स (वसा, तेल और ग्रीस) की उपलब्धता का उपयोग करके टिकाऊ विमानन ईंधन (aviation fuel) का प्रमुख उत्पादक बनने की क्षमता है। भारत में कार्बन कटौती के प्रयास किए जा रहे हैं और पिछले कुछ वर्षों में भारतीय विमानन कंपनियों ने पर्यावरण अनुकूल यानी टिकाऊ विमानन ईंधन (SAF) और पारंपरिक एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के मिश्रण के साथ कुछ उड़ानें संचालित की हैं।

अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) में निदेशक (नेट जीरो ट्रांजिशन) हेमंत मिस्त्री ने कहा कि एसएएफ के लिए पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो गया है, लेकिन अभी और काम किया जाना बाकी है। मिस्त्री ने हाल ही में जिनेवा में कहा, “भारत के लिए इस समय कुछ बहुत अच्छे अवसर हैं। इनमें से एक अवसर कृषि अपशिष्ट जैसे एसएएफ कच्चे माल के संदर्भ में है…एसएएफ उत्पादन के लिए क्या करना है, इस बारे में समझ बढ़ रही है। हम यह समझने के लिए कई कंपनियों से बात कर रहे हैं कि हम पेट्रोलियम कंपनियों के साथ कैसे सहयोग कर सकते हैं।”

कितना बड़ा है ATF का ग्लोबल कारोबार-

एविएशन इंडस्ट्री में किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा विमानों के लिए ईंधन खरीदने में जाता है। वैश्विक स्तर पर एविएशन फ्यूल पर कंपनी को औसतन 28.7 फीसदी खर्च करना पड़ता है, जो किसी और मद के खर्च से कहीं ज्यादा है। एयरलाइनों की लागत का विभाजन क्षेत्र के अनुसार काफी भिन्न होता है। उदाहरण के लिए, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में, विमान ईंधन कुल एयरलाइन लागत का 36.3% बनाता है, जबकि उत्तरी अमेरिका में यह 25.5% है। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ये 30 फीसदी है।

वैश्विक स्तर पर विमानन ईंधन बाजार का मूल्य 2023 में $391.23 बिलियन था, जिसके साल 2032 तक बढ़कर $819.73 बिलियन हो जाने का अनुमान है। याने आने वाले समय में ये कारोबार 70 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। ऐसे में यदि भारत वैश्विक विमानन ईंधन का हब बनता है, तो इस ग्लोबल बिजनेस का एक बड़ा हिस्सा भारत में होगा, जिसका सीधा फायदा इस सेक्टर में कारोबार करनेवाली कंपनियों को होगा।

बता दें कि भारत में विमानन ईंधन की कीमतें ऐसी हैं कि आप सुनकर चौंक जाएंगे। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई में विमानन ईंधन (aviation fuel) की कीमत 1 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से ज्यादा होती है, वहीं मुंबई में फिलहाल ये एक लाख किलोलीटर से थोड़े कम पर मिलता है।

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