Last Updated on जनवरी 21, 2025 14:00, अपराह्न by Pawan
Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 21 जनवरी को भारी गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1% से अधिक टूट गए। बीएसई सेंसेक्स 848.65 अंक या 1.1 फीसदी टूटकर 76,224.79 अंक पर आ गया। वहीं निफ्टी 217.05 अंक या 0.92 फीसदी का गोता लगाकर 23,127.70 के स्तर पर आ गया। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू एक झटके में करीब 5 लाख करोड़ रुपये कम हो हुई। सबसे अधिक गिरावट रियल्टी और कंज्यूमर शेयरों में देखने को मिली। शेयर बाजार में डर का संकेत देने वाला इंडिया VIX इंजेक्स आज कारोबार के दौरान 5% उछल गया।
शेयर बाजार की इस गिरावट के पीछे 5 सबसे बड़े कारण क्या रहे, आइए जानते हैं-
1. ट्रंप ने BRICS देशों पर दी टैरिफ लगाने की धमकी
डोनाल्ड ट्रंप का ब्रिक्स (BRICS) देशों पर निशाना साधते हुए दिए गए बयान ने निवेशकों में खलबली मचा दी है। ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, रूस और साउथ अफ्रीका के साथ भारत भी शामिल हैं। ट्रंप ने सोमवार को राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालते ही यह साफ किया कि वह उन देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का इरादा रखते हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। व्हाइट हाउस में बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी, “अगर कोई BRICS देश… डीडॉलराइजेशन यानी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश जारी रखने के बारे में सोचेगा, तो उसे 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।”
BRICS का एक प्रमुख सदस्य होने के नाते भारत पर ऐसी स्थित का खासा असर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह आक्रामक रुख भारत के व्यापारिक समीकरणों पर असर डाल सकता है और बाजार में बड़े स्तर पर चिंता पैदा कर सकता है। इसके अलावा, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आने वाले समानों पर फरवरी से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना का भी ऐलान किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में और अधिक रुकावटें आने की आशंका बढ़ गई है।
मेहता इक्विटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) प्रशांत तापसे ने कहा, “ट्रंप के टैरिफ से जुड़े फैसले भारतीय बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण हैं। भारत पर उनके रुख को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।”
2. कमजोर तिमाही नतीजे
दिसंबर तिमाही में कंपनियों के मिले-जुले तिमाही नतीजों ने बाजार में चिंता को और बढ़ा दिया है। डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयर आज 14 प्रतिशत से अधिक गिर गए। दिसंबर तिमाही के दौरान कंपनी के कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में तिमाही आधार पर गिरावट द्रज की गई। जोमैटो के शेयर भी आज बाजार खुलते ही 9 प्रतिशत तक क्रैश हो गए। जोमैटो अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट का आक्रामक तरीके से विस्तार कर रही है, जिसका असर इसके दिसंबर तिमाही के मुनाफे पर पड़ा है।
रियल एस्टेट सेक्टर में भी ओबेरॉय रियल्टी के शेयर 7.6 प्रतिशत गिर गए, क्योंकि इसके नतीजे बाजार की उम्मीदों से कम रहे। इन निराशाजनक नतीजों के चलते कई प्रमुख सेक्टर्स के ग्रोथ संभावनओं पर सवाल उठे हैं, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।
3. जापान में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद
बैंक ऑफ जापान (BOJ) की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से भी ग्लोबाल बाजारों में आज बेचैनी दिखी। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो यह पिछले साल जुलाई के बाद से पहली बढ़ोतरी होगी। इसे बढ़ोतरी को अहम कदम माना जा रहा गै, जो ग्लोबल स्तर पर उधार लेने की लागत को प्रभावित कर सकता है। इससे लिक्विडिटी में कमी और भारत जैसे उभरते बाजारों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
4. विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से पैसे निकालना जरूरी रखा है। सोमवार 20 जनवरी को उन्होंने शुद्ध रूप से करीब 4,336.54 रुपये के शेयर बेचे। जनवरी महीने में अबतक विदेशी निवेशकर करीब 50,912.60 रुपये की बिकवाली कर चुके हैं, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
5. आगामी बजट को लेकर अनिश्चितता
इसके अलावा आगामी बजट 2025 के चलते भी एक अनिश्चतता का माहौल देखा जा रहा और निवेशक बजट के ऐलानों से पहले ‘देखो और इंतजार करो’ के मूड में दिखाई दे रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वाइस-प्रेसिडेंट चित जैन ने कहा, “इंडिया VIX इंडेक्स आज 5% से अधिक उछल गया, जो आम बजट से पहले बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दिखाता है। FIIs भी भारतीय बाजार में बिकवाल बने हुए हैं और उन्होंने इस महीने 50,000 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे हैं। यह बाजार में दिख रही गिरावट का मुख्य कारण है।”
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