Last Updated on अप्रैल 23, 2025 9:52, पूर्वाह्न by
नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटर सेबी को सुझाव मिले हैं। जो लोग शेयर मार्केट में जोखिम भरे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) प्रोडक्ट्स में ट्रेडिंग करना चाहते हैं, उनका पहले टेस्ट लिया जाए। ऐसा निवेशकों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। इस तरह के सिस्टम सिंगापुर, हॉन्ग कॉन्ग और यूरोपियन यूनियन (EU) में पहले से लागू हैं। ये प्रस्ताव सेबी के पास तब आए हैं, जब रेगुलेटर ने पिछले महीने इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग के नियमों में बदलाव के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इस पेपर पर अपनी राय भेजने की आखिरी तारीख 17 अप्रैल थी।
क्या है सुझाव?
सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे सोच यह है कि रिटेल निवेशकों को बचाने के लिए पूरी इंडस्ट्री पर सख्त नियम थोपने के बजाय, सेबी उन्हें सही ट्रेनिंग दे। इससे उनके लिए जोखिम भरे फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सौदों में ट्रेडिंग करना ज्यादा सेफ हो जाएगा। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस कंसल्टेशन पेपर पर राय देने वालों की एक बड़ी चिंता यह है कि सेबी के प्रस्ताव भले ही आम निवेशकों को बचा लें, लेकिन इनसे सारा कारोबार कुछ गिने-चुने एक्सचेंजों तक सिमट सकता है। सूत्रों ने कहा कि ये प्रस्ताव एक्सचेंजों को नए प्रोडक्ट्स लाने से भी रोक सकते हैं।
एक्सपायरी पर क्या कहना है?
मार्केट रेगुलेटर को ऐसी राय भी मिली है कि F&O एक्सपायरी को हफ्ते के सिर्फ एक या दो दिन तक सीमित करने से एक्सपायरी वाले दिनों के आसपास बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) कई गुना बढ़ सकता है। इससे कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाले दिनों में रिस्क मैनेजमेंट के लिए महंगी कंप्यूटर टेक्नोलॉजी और सिस्टम लगाने की जरूरत भी बढ़ जाएगी। साथ ही, अगर कोई नया एक्सचेंज इस फील्ड में आना चाहता है, लेकिन इतनी महंगी टेक्नोलॉजी पर भारी रकम खर्च नहीं कर सकता, तो इस कदम से कॉम्पिटिशन खत्म हो सकता है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
फाइनेंशियल सर्विसेज कंसल्टेंसी फर्म MCQube के मृगांक परांजपे के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी को हफ्ते में सिर्फ मंगलवार या गुरुवार तक सीमित रखने के प्रस्ताव से एक्सपायरी वाले दिन सारा कारोबार (volumes) एक ही एक्सचेंज पर शिफ्ट हो सकता है और इससे मुकाबला खत्म हो सकता है। परांजपे ने यह भी कहा कि सारे कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी को हफ्ते के आखिरी दिन करने का प्रस्ताव पूरे बाजार के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
क्या है ऐतराज?
सेबी के इस प्रस्ताव पर कि हर एक्सचेंज सिर्फ एक ही बेंचमार्क इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट दे सकेगा, कई लोगों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे प्रोडक्ट्स की वैरायटी कम हो सकती है। खासकर ऐसे बाजार में जहां निफ्टी (Nifty), सेंसेक्स (Sensex), बैंक निफ्टी (Bank Nifty) और बीएसई 100 (BSE 100) जैसे कई इंडेक्स में खूब ट्रेडिंग होती है।
एक सूत्र ने बताया कि इनमें से हर इंडेक्स अलग-अलग तरह के निवेशकों और उनकी ट्रेडिंग की स्ट्रैटेजी के काम आता है। इसलिए, सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट तक सीमित करने से नए प्रोडक्ट्स लाने में रुकावट आ सकती है और ट्रेडर्स को मजबूरी में कुछ ही इंस्ट्रूमेंट्स में ट्रेडिंग करनी पड़ सकती है। इससे जोखिम और बढ़ सकता है, जो पॉलिसी के मकसद के बिल्कुल उल्टा होगा।