Your Money

Gold Price Outlook: 2026 में भी सोने से बनेगा तगड़ा पैसा? ये 5 फैक्टर करेंगे तय

Gold Price Outlook: 2026 में भी सोने से बनेगा तगड़ा पैसा? ये 5 फैक्टर करेंगे तय

Last Updated on दिसम्बर 31, 2025 18:02, अपराह्न by Pawan

Gold Price Outlook: 2025 में सोने ने जबरदस्त तेजी दिखाई। दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की ओर मोड़ा। सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी ने मांग को मजबूत किया। ब्याज दरों में कटौती और कई प्रमुख करेंसी की कमजोरी ने भी सोने की कीमतों को सपोर्ट दिया। इन सभी कारणों ने मिलकर सोने के मजबूत प्रदर्शन की ठोस बुनियाद तैयार की।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत 29 दिसंबर को $4,550.10 प्रति औंस के शिखर पर पहुंच गई। यह साल की शुरुआत के $2,638.74 के मुकाबले करीब 42% का रिटर्न है। वहीं, भारत में MCX पर सोने के फ्यूचर्स ने और भी तेज उछाल दिखाया। 24 दिसंबर 2024 को ₹78,950 से बढ़कर 29 दिसंबर 2025 को ₹1,38,217 तक पहुंच गया। यानी करीब 75% की बढ़त।

दुनिया की सबसे कीमती एसेट बना सोना

मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सोना इस समय दुनिया की सबसे कीमती एसेट है। इसका कुल मार्केट कैप करीब $30.48 ट्रिलियन आंका गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या 2026 में भी सोना इसी तरह चमकता रहेगा?

2026 में सोने पर किन फैक्टर का दिखेगा असर?

VT Markets के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल का कहना है कि 2026 में सोने की कीमतें सट्टेबाजी से ज्यादा, ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता, भरोसे और मजबूती से जुड़ी चिंताओं पर निर्भर होंगी। उनके मुताबिक, सोने की चाल कुछ खास फैक्टर से तय होगी।

  1. ब्याज दरों का चक्र: अगर रियल इंटरेस्ट रेट्स नीचे जाते हैं, तो सोना रखने की लागत घटेगी और डिमांड बढ़ेगी।
  2. महंगाई का जोखिम: भले ही हेडलाइन इंफ्लेशन कम हो, लेकिन करेंसी की वैल्यू घटने का डर निवेशकों को सोने की ओर खींच सकता है।
  3. सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ: बढ़ते फिस्कल डेफिसिट से फिएट करेंसी पर भरोसा कमजोर होता है और सोना लॉन्ग टर्म वैल्यू स्टोर के रूप में मजबूत बनता है।
  4. भू-राजनीतिक तनाव: ट्रेड वॉर, क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक तनाव से सेफ हेवन एसेट्स की मांग बढ़ती है।
  5. डिमांड-सप्लाई फैक्टर: उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ता मांग और नई खदानों के धीमे विकास से सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

सेंट्रल बैंकों की ब्याज दरें क्यों हैं अहम

2026 में सोने की कीमतों पर सेंट्रल बैंकों के फैसलों का बड़ा असर रहेगा। अगर ब्याज दरों में कटौती होती है या लंबे समय तक दरें स्थिर रहती हैं, तो रियल यील्ड कम होगी और सोना ज्यादा आकर्षक बनेगा।

रॉस मैक्सवेल का मानना है कि अगर लिक्विडिटी बढ़ती है या सख्ती कम होती है, तो करेंसी कमजोर होने का डर बढ़ेगा और सोने की मांग को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि, अगर रियल रेट्स ऊंचे बने रहते हैं और महंगाई को काबू में रखने की सख्त नीति रहती है, तो सोने की तेजी सीमित रह सकती है।

Gold price crash: इन 5 वजहों से क्रैश हुआ गोल्ड, 6% तक गिरा भाव; अब आगे क्या होगा? - gold price crash reasons and future outlook after 6 percent drop in international market | Moneycontrol Hindi

Augmont की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी भी मानती हैं कि ब्याज दरों में तेज कटौती या उम्मीद से ज्यादा ढील रियल यील्ड घटाती है, जिससे सोने को सपोर्ट मिलता है। साथ ही, सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी सोने को रिजर्व एसेट के तौर पर मजबूत बनाती है।

2026 में सोना या चांदी- कौन बेहतर रहेगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में सोना, चांदी के मुकाबले ज्यादा स्थिर रिटर्न दे सकता है। सोना अनिश्चित हालात में एक डिफेंसिव एसेट की तरह काम करता है।

चांदी में इंडस्ट्रियल डिमांड की वजह से तेजी की ज्यादा संभावना होती है। लेकिन, मंदी या स्लो ग्रोथ के समय यह ज्यादा गिर भी सकती है। यानी चांदी में मुनाफे की संभावना ज्यादा है, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है। वहीं, सोना अनिश्चित हालात में ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है।

ग्लोबल तनाव और फाइनेंशियल रिस्क का असर

जब दुनिया में तनाव और फाइनेंशियल जोखिम बढ़ते हैं, तो सोने की सेफ हेवन भूमिका और मजबूत हो जाती है। जियोपॉलिटिकल टकराव, ट्रेड विवाद, राजनीतिक अस्थिरता और बैंकिंग सेक्टर की परेशानी निवेशकों को सोने की ओर ले जाती है।

इसके अलावा, कई सेंट्रल बैंक विदेशी करेंसी पर निर्भरता कम करने के लिए अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा सकते हैं। इससे सोने की डिमांड लंबे समय तक बनी रह सकती है।

2026 में कितना रहेगा सोने का दाम?

रॉस मैक्सवेल के मुताबिक, 2026 में सोना एक तय दायरे में ट्रेड कर सकता है, न कि सीधी तेजी में। अनुमान के मुताबिक कीमत $3,900 से $5,000 प्रति औंस के बीच रह सकती है। अगर वैश्विक तनाव या फाइनेंशियल संकट बढ़ता है, तो इससे ऊपर भी जा सकती है।

वहीं, अगर रियल ब्याज दरें ऊंची रहीं और इकोनॉमिक ग्रोथ मजबूत रही, तो सोने पर दबाव आ सकता है। रेनिशा चैनानी का अनुमान है कि सोना $4,000 से $5,500 प्रति औंस के दायरे में रह सकता है। हाई ग्लोबल डेट, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी इसे सपोर्ट देगी।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने को शॉर्ट टर्म ट्रेड नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म हेज के तौर पर देखना चाहिए। यह पोर्टफोलियो में जोखिम को संतुलित करने का काम करता है।

निवेशकों को चाहिए कि वे एक साथ बड़ा निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करें। ताकि उतार-चढ़ाव का असर कम हो और सोना एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करता रहे।

Disclaimer: stock market news पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को stock market news की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Source link

Click to comment

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Most Popular

To Top