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India vs China Markets: चुपके से बदल गई चाल… अमेरिका और चीन रह गए भारत से पीछे, कैसे हुआ ये उलटफेर?

India vs China Markets: चुपके से बदल गई चाल… अमेरिका और चीन रह गए भारत से पीछे, कैसे हुआ ये उलटफेर?

Last Updated on नवम्बर 29, 2025 17:49, अपराह्न by Khushi Verma

शेयर बाजार में तेजी के बावजूद छोटे निवेशकों में उत्साह की कमी है, लेकिन हील‍िओस कैप‍िटल के समीर अरोड़ा का मानना है कि बाजार पलट चुका है और दुनिया के बड़े बाजारों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकारी सुधारों से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इससे भविष्य में और तेजी की उम्मीद है।

नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार ने 14 महीने बाद नया शिखर छुआ है। हालांकि, कई छोटे निवेशकों को अभी भी खुशी नहीं है। हेलिओस कैपिटल के समीर अरोड़ा का मानना है कि यह धारणा असल कहानी को छुपा रही है। उनके मुताबिक, बाजार पहले ही पलट चुका है। अब यह दुनिया के लगभग हर बड़े बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। सरकार के सुधारों से बाजार को रफ्तार मिली है।समीर अरोड़ा ने ईटी नाउ को दिए इंटरव्यू में बताया कि पिछले दो महीनों में एमएससीआई इंडिया 5.5% बढ़ा है। वहीं, चीन 6% गिरा है। उभरते बाजार सिर्फ 1.8% बढ़े हैं। अमेरिकी बाजारों में 2.5% से भी कम की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, ‘डॉलर के हिसाब से भारत इस समय सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक है।’

छोटे शेयर भी पकड़ेंगे रफ्तार

निवेशकों में यह फीकी सी भावना इसलिए है क्योंकि स्मॉलकैप में भारी निवेश वाले पोर्टफोलियो अभी तक पहले के शिखर पर नहीं पहुंचे हैं। लेकिन, अरोड़ा का कहना है कि व्यापक बाजार पहले ही स्थिर होकर पलट चुका है। उन्होंने बताया, ‘हमारा मिडकैप फंड जो मार्च में लॉन्च हुआ था, वह पहले ही 30% बढ़ चुका है। इसी अवधि में मिडकैप इंडेक्स 20% बढ़ा है। यह रैली हो चुकी है – यह बस तब दिखाई नहीं देती जब आप 2024 के हाई से तुलना करते हैं।’

अरोड़ा का मानना है कि जब विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बिकवाली कम करेंगे और घरेलू मांग, जो सरकारी सुधारों से बढ़ी है, बढ़ने लगेगी, तब और ज्यादा निवेशक बाजार में लौटेंगे।

सुधारों से बाजार को मिली रफ्तार

समीर अरोड़ा बाजार के इस बेहतर होते मिजाज का श्रेय सरकार के हालिया सुधारों को देते हैं। इनमें जीएसटी दरों में कटौती, आरबीआई का ब्याज दरों को घटाना, इनकम टैक्‍स में कटौती और टैरिफ से जुड़े अडजस्‍टमेंट शामिल हैं।
उन्होंने समझाया, ‘ये बदलाव सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालते हैं। हो सकता है कि ये किसी खास कंपनी के नतीजों में तुरंत न दिखें, लेकिन ये घरों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हैं। यही अर्थव्यवस्था को सहारा देता है।’

एक्सचेंज और ब्रोकर शेयरों से क्यों बना रहे दूरी?

समीर अरोड़ा कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों, खासकर ब्रोकर, एक्सचेंज और डिपॉजिटरी कंपनियों से सावधान हैं। ऐसा तब है जब बीएसई और एमसीएक्‍स 2024 में काफी बढ़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी, ‘सट्टा आधारित वॉल्यूम बहुत ज्यादा हैं। रेगुलेटरों को यह पसंद नहीं है। कोरोना के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम 10-15 गुना बढ़ गए थे। यह टिकाऊ नहीं है।’

उनका मानना है कि इन व्यवसायों को सीधे ऊपर जाने के बजाय पहले सामान्य होना होगा। फिर सुधार करना होगा और उसके बाद धीरे-धीरे बढ़ना होग

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