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Stock Market Performance: इस ‘ट्रिपल’ फैक्‍टर से बना दहशत का माहौल… भारत की उड़ा दी है चमक, चीन-जापान-कोरिया निकले आगे

Stock Market Performance: इस ‘ट्रिपल’ फैक्‍टर से बना दहशत का माहौल… भारत की उड़ा दी है चमक, चीन-जापान-कोरिया निकले आगे

Last Updated on दिसम्बर 15, 2025 7:50, पूर्वाह्न by Khushi Verma

दिसंबर में भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का टलना, बढ़ता व्यापार घाटा और रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर नकारात्मक धारणा है। एशियाई बाजारों में भी मुनाफावसूली तेज हुई है, जिससे भारतीय बाजार का प्रदर्शन फीका रहा है।

नई दिल्‍ली: दिसंबर की शुरुआत से भारतीय शेयर बाजार में उथल-पुथल बढ़ गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों ( एफआईआई ) ने नवंबर की तुलना में ज्‍यादा बिकवाली की। एफआईआई भारत को लेकर सतर्क हो गए हैं। इसकी वजह ट्रिपल फैक्‍टर हैं। इनमें अमेरिका-भारत के बीच व्यापारिक समझौते का टलना, बढ़ता व्यापार घाटा और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर बनी नकारात्मक धारणा है। दिसंबर के दूसरे हफ्ते में एशियाई बाजारों में एफआईआई ने मुनाफावसूली और तेज कर दी। इसकी मुख्य वजह जापान के बॉन्ड यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज) का बढ़ना और चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के शानदार 2025 के प्रदर्शन के बाद मुनाफा सुरक्षित करने का ट्रेंड रहा।जापान में 10-साल की बॉन्ड यील्ड एक महीने पहले 1.70% से बढ़कर 1.95% हो गई। इससे येन (जापानी मुद्रा) कैरी ट्रेड में उलटफेर का खतरा पैदा हो गया। येन कैरी ट्रेड कम ब्याज दर वाली मुद्रा उधार लेकर ज्‍यादा ब्याज दर वाली मुद्रा में निवेश करना है। बैंक ऑफ जापान (BOJ) के ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है क्योंकि महंगाई लगातार 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। नई प्रधानमंत्री ताकाइची की प्रोत्साहन योजना के कारण और ज्‍यादा सरकारी कर्ज जारी करना पड़ सकता है। इससे देश का डेट-टू-जीडीपी अनुपात (जीडीपी के मुकाबले कर्ज का स्तर) और बढ़ जाएगा, जो अभी लगभग 260% है। ऐसे हालात में येन-आधारित निवेशों को बेचकर उभरते बाजारों में मुनाफावसूली हो सकती है। इस साल अब तक निक्‍केई (जापान), हेंगसेंग (हांगकांग), कोस्‍पी (दक्षिण कोरिया) और शंघाई (चीन) सूचकांकों ने 27.5%, 29.5%, 73.7% और 16.0% का डॉलर रिटर्न दिया है।

भारतीय बाजार का फीका प्रदर्शन

भारत ने अपने एशियाई साथियों के मुकाबले काफी कम प्रदर्शन किया है। भारतीय शेयर बाजार ने डॉलर के लिहाज से लगभग 10% का रिटर्न दिया है, जबकि रुपये में 5.7% की गिरावट आई है। अगर एफआईआई एशियाई संपत्तियों को लेकर सतर्क होते हैं तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। कारण है कि भारत भी इसी समूह का हिस्सा है और इसका एक बड़ा हिस्सा रखता है।

इसी बीच, भारतीय बाजार पहले से ही सुधरने के दौर से गुजर रहा है। रुपये की अस्थिरता बढ़ी है और विनिमय दर 90.4 रुपये प्रति डॉलर के नए निचले स्तर को पार कर गई है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अंतिम रूप न ले पाने की अनिश्चितता के कारण यह दबाव और बढ़ रहा है। इससे निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और व्यापार घाटा बढ़ रहा है। चूंकि एफआईआई उभरते बाजारों में मुनाफावसूली के मोड में आ सकते हैं। ऐसे में भारत का निकट-अवधि का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का समय पर पूरा होना बाजार की भावना और आर्थिक विकास को सहारा देने के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जो कुल निर्यात का पांचवां हिस्सा है।

डील में देरी से प्रत‍िकूल असर पड़ने की आशंका

व्यापार समझौते में देरी से 2026 में कंपनियों की कमाई और शेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। यह एक ऐसा जोखिम है जिसे मौजूदा बाजार मूल्यांकन में पूरी तरह से शामिल नहीं किया गया है। इस देरी से रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, आने वाले महीनों में चालू खाता घाटा कम हो सकता है। हालिया घाटे का एक बड़ा हिस्सा त्योहारी और शादी के मौसम के दौरान सोने-चांदी की मौसमी मांग के कारण था।

हफ्ते के अंत तक, बाजार के रुझान में मामूली सुधार देखा गया। यह 0.25% फेड दर कटौती के बाद हुआ। इसका वैश्विक बाजार ने सकारात्मक स्वागत किया। हालांकि, इसके स्थायी सकारात्मक प्रभाव की संभावना सीमित लगती है। आने वाले आंकड़ों के आधार पर निकट भविष्य में और दर कटौती की

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