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SUV से लेकर सेडान, हैचबैक और MPV तक… GST सुधार के बाद कितना लगेगा टैक्स? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SUV से लेकर सेडान, हैचबैक और MPV तक… GST सुधार के बाद कितना लगेगा टैक्स? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Last Updated on अगस्त 26, 2025 13:00, अपराह्न by Khushi Verma

GST on cars: ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) ने केंद्र सरकार के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) रेट को सरल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब आने वाले समय में टैक्स स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कार बाजार के लिए राहत की बात यह होगी कि सभी सेगमेंट की गाड़ियों पर टैक्स का बोझ कम हो जाएगा।

GST में किस तरह का बदलाव होगा?

फिलहाल GST स्ट्रक्चर चार स्लैब पर आधारित है- 5%, 12%, 18% और 28%। रैशनलाइजेशन के तहत 12% और 28% वाले स्लैब को हटाया जाएगा और केवल 5% और 18% स्लैब को रखा जाएगा। इसके अलावा सिन (sin) और लग्जरी गुड्स पर 40% का नया स्लैब लाया जाएगा।

मंत्रियों के समूह की मंजूरी के बाद अब यह मामला 3 और 4 सितंबर को होने वाली 56वीं GST काउंसिल की बैठक में चर्चा के लिए जाएगा।

अभी कारों पर कितना लगता है GST?

अभी चाहे कोई भी कैटेगरी हो, सभी कारों पर अभी 28% GST लगता है। इसके अलावा बॉडी स्टाइल, लंबाई, इंजन के प्रकार और क्षमता के आधार पर 0% से 22% तक का कंपन्सेशन सेस भी लगाया जाता है। इस तरह कुल टैक्स 29% (न्यूनतम) से लेकर 50% (अधिकतम) तक हो सकता है।

तुलना के लिए बता दें कि सभी इलेक्ट्रिक व्हीलक (EVs) पर केवल 5% GST लगता है और कोई सेस नहीं लगता।

कारों पर मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर

कारों पर मौजूदा GST स्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से समझाने के लिए नीचे टेबल दी गई है।

क्या कारें होंगी सस्ती?

छोटी कारों को मौजूदा 28% वाले GST स्लैब से हटाकर 18% स्लैब में डाला जा सकता है, जबकि बड़ी गाड़ियों को नए 40% स्लैब में रखा जा सकता है। अभी तक इस पर साफ नहीं है कि सेस बरकरार रहेगा या नहीं। अगर सेस हटा दिया गया तो छोटी कारें सस्ती हो जाएंगी।

यहां छोटी कारों से मतलब है- SUVs, सेडान, हैचबैक और MPVs, जिनकी लंबाई 4 मीटर तक हो और इंजन क्षमता पेट्रोल के लिए 1,200cc तक और डीजल के लिए 1,500cc तक हो। एक्सपर्ट का मानना है कि इससे इन मॉडलों की कीमतों में 6-10% तक की गिरावट आ सकती है।

हालांकि, बड़ी SUVs, सेडान, हैचबैक और MPVs पर टैक्स किस तरह लगेगा, यह अभी साफ नहीं है। अगर केवल 40% GST लगाया गया तो वे भी सस्ती हो सकती हैं। लेकिन कुछ राज्यों ने रेवेन्यू पर असर पड़ने को लेकर चिंता जताई है। ऐसे में यह देखना होगा कि GST काउंसिल अतिरिक्त लेवी जोड़ती है या नहीं ताकि रेवेन्यू का नुकसान पूरा किया जा सके।

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